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Saman Suttam समणसुत्तं Sanskrit

चतुर्थ खण्ड – स्याद्वाद

३९. नयसूत्र Hindi 693 View Detail
Mool Sutra: तीर्थंकरवचनसंग्रहविशेषप्रस्तार - मूलव्याकरणी। द्रव्यार्थिकश्च पर्यवनयश्च, शेषाः विकल्पाः एतेषाम्।।४।।

Translated Sutra: तीर्थंकरों के वचन दो प्रकार के हैं--सामान्य और विशेष। दोनों प्रकार के वचनों की राशियों के (संग्रह के) मूल प्रतिपादक नय भी दो ही हैं--द्रव्यार्थिक और पर्यायार्थिक। शेष सब नय इन दोनों के ही अवान्तर भेद हैं। (द्रव्यार्थिक नय वस्तु के सामान्य अंश का प्रतिपादक है और पर्यायार्थिक विशेषांश का।)
Saman Suttam समणसुत्तं Sanskrit

चतुर्थ खण्ड – स्याद्वाद

४०. स्याद्वाद व सप्तभङ्गीसूत्र Hindi 717 View Detail
Mool Sutra: अस्तीति नास्ति द्वावपि, च अवक्तव्यं स्याता संयुक्तम्। अवक्तव्यास्ते तथा, प्रमाणभङ्गी सुज्ञातव्या।।४।।

Translated Sutra: स्यात् अस्ति, स्यात् नास्ति, स्यात् अस्ति-नास्ति, स्यात् अवक्तव्य, स्यात् अस्ति-अवक्तव्य, स्यात् नास्ति-अवक्तव्य, स्यात् अस्ति नास्ति-अवक्तव्य--इन्हें प्रमाण सप्तभंगी जानना चाहिए।
Saman Suttam समणसुत्तं Sanskrit

चतुर्थ खण्ड – स्याद्वाद

४१. समन्वयसूत्र Hindi 725 View Detail
Mool Sutra: ते सापेक्षाः सुनयाः, निरपेक्षाः ते अपि दुर्नया भवन्ति। सकलव्यवहारसिद्धिः, सुनयाद् भवति नियमेन।।४।।

Translated Sutra: वे नय (विरोध होने पर भी) सापेक्ष हों तो सुनय कहलाते हैं और निरपेक्ष हों तो दुर्नय। सुनय से ही नियमपूर्वक समस्त व्यवहारों की सिद्धि होती है।
Saman Suttam समणसुत्तं Sanskrit

चतुर्थ खण्ड – स्याद्वाद

४२. निक्षेपसूत्र Hindi 740 View Detail
Mool Sutra: साकारेतरा स्थापना, कृत्रिमेतरा हि बिम्बजा प्रथमा। इतरा इतरा भणिता, स्थापनाऽर्हंश्च ज्ञातव्यः।।४।।

Translated Sutra: जहाँ तक वस्तु का किसी अन्य वस्तु में आरोप किया जाता है वहाँ स्थापना निक्षेप होता है। यह दो प्रकार का है--साकार और निराकार। कृत्रिम और अकृत्रिम अर्हत् की प्रतिमा साकार स्थापना है तथा किसी अन्य पदार्थ में अर्हत् की स्थापना करना निराकार स्थापना है।
Saman Suttam समणसुत्तं Sanskrit

चतुर्थ खण्ड – स्याद्वाद

४४. वीरस्तवन Hindi 753 View Detail
Mool Sutra: हस्तिप्वेरावणमाहुः ज्ञातं, सिंहो मृगाणां सलिलानां गङ्गा। पक्षिषु वा गरुडो वैनतेयः निर्वाणवादिनामिह ज्ञातपुत्रः।।४।।

Translated Sutra: जैसे हाथियों में ऐरावत, मृगों में सिंह, नदियों में गंगा, पक्षियों में वेणुदेव (गरुड़) श्रेष्ठ हैं, उसी तरह निर्वाणवादियों में ज्ञातपुत्र (महावीर) श्रेष्ठ थे।
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